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Sunday, April 24, 2011

घर - 5


घर
मेरा कोई है नहीं
घर मुझे चाहिए
घर के भीतर प्रकाश हो
इसकी भी मुझे चिंता नहीं है
प्रकाश के घेरे के भीतर मेरा घर हो
इसी की मुझे तलाश है
ऐसा कोई घर आपने देखा है ?
देखा हो
तो मुझे भी उसका पता दें
न देखा हो
तो मैं आपको भी
सहानुभूति तो दे ही सकता हूँ
मानव होकर भी हम-आप
अब ऐसे घरों में नहीं रह सकते
जो प्रकाश के घेरे में हैं
पर हम
बेघरों की परस्पर हमदर्दी के
घेरे में तो रह ही सकते हैं


घर - 4



घर
हैं कहाँ जिनकी हम बात करते हैं
घर की बातें 
सबकी अपनी हैं
घर की बातें
कोई किसी से नहीं करता
जिनकी बातें होती हैं
वे घर नहीं हैं

-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"


घर - 3



दूसरों के घर
भीतर की ओर खुलते हैं
रहस्यों की ओर
जिन रहस्यों को वे खोलते नहीं 
शहरों में होते हैं
दूसरों के घर दूसरे के घरों में
दूसरों के घर
दूसरों के घर हैं

- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"


Saturday, April 23, 2011

घर - 2


तुम्हारा घर
वहाँ है
जहाँ सड़क समाप्त होती है
पर मुझे जब
सड़क पर चलते ही जाना है
तब वह समाप्त कहाँ होती है ?
तुम्हारा घर....

- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"




घर - 1


मेरा घर
दो दरवाज़ों को जोड़ता एक घेरा है
मेरा घर
दो दरवाज़ों के बीच है
उसमें किधर से भी झाँको
तुम दरवाज़े से बाहर देख रहे होगे
तुम्हें पार का दृश्य दीख जाएगा
घर नहीं दीखेगा

- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"